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Narasimha Bhagwan Ki Aarti: संकट मोचक श्री नरसिंह भगवान की आरती

भगवान नरसिंह, श्री विष्णु के चौथे अवतार माने जाते हैं जो अर्ध-मानव और अर्ध-सिंह रूप में प्रकट हुए। उनका यह अवतार धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए हुआ था। जब राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी सत्ता के मद में आकर भगवान का अस्तित्व नकार दिया और अपने ही पुत्र भक्त प्रह्लाद को यातनाएं देने लगा, तब श्रीहरि ने नरसिंह रूप में खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया।

नरसिंह भगवान का रूप जितना उग्र है, उतना ही करुणा से भरा भी है। यह आरती न केवल भक्तों को भय, संकट और शत्रुओं से मुक्ति देती है, बल्कि आंतरिक आत्मबल और विश्वास भी प्रदान करती है। भक्तगण हर शनिवार और नरसिंह जयंती पर विशेष रूप से इस आरती का पाठ करते हैं।

ॐ जय नरसिंह देवा, प्रभु जय नरसिंह देवा।
भक्त प्रह्लाद बचायो, दैत्य विनाशन केवा॥

सिंह मुख विशाल विराजे, तेज अनोखा भारी।
कर में चक्र और गदा, महिमा तुम्हारी न्यारी॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

नाखूनों से फाड़ दियो, हिरण्यकश्यप क्रूर।
धरा रूप तू उग्र भयंकर, शरण में तेरे सुर॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

भक्तन को भय न व्यापे, संकट दूर कर दे।
जो भी नाम तेरा जपता, भवसागर तर दे॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

लक्ष्मी संग सदा बिराजे, वैकुण्ठ तुम्हारा धाम।
तेरी लीला अपरम्पार, जगत करे गुणगान॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

प्रह्लाद सदा करे वंदन, चरणों में लीन रहे।
तू पालनहार भक्तन का, हर युग में तू सहे॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

जो भी पाठ करे आरती, प्रेम सहित दिन-रात।
उसके घर में रहे सदा, सुख-शांति और साथ॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

जपें “ॐ नरसिंहाय नमः”, भाव सहित जो जन।
वो पाएं मनवांछित फल, मिटें जन्मों के बंधन॥
ॐ जय नरसिंह देवा…

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