गाय को हिंदू धर्म में “मातृस्वरूपा” यानी माँ के समान माना गया है। उसे “गौ माता” कहकर पूजा जाता है। इसका कारण सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक भी है।
पुराणों और वेदों में गाय को देवताओं का निवास स्थान कहा गया है। मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि उसकी सेवा करना देव सेवा के समान माना जाता है।

गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर – ये पांच चीजें पंचगव्य कहलाती हैं, जिनका उपयोग पूजा, हवन और आयुर्वेदिक औषधियों में होता है। गाय का गोबर वातावरण को शुद्ध करता है, और गोमूत्र का उपयोग औषधीय गुणों के लिए किया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल या गोविंद कहा गया क्योंकि उन्होंने अपना बचपन गायों के बीच बिताया और गौसेवा को सर्वोपरि रखा। यही परंपरा आज भी जीवित है।
गाय अहिंसा का प्रतीक है – वह कुछ भी नहीं मांगती, केवल देती है – दूध, खाद, औषधि और प्रेम। उसकी शांत, स्नेहिल और सेवा भावी प्रकृति मनुष्य को धर्म, करुणा और सेवा की ओर प्रेरित करती है।
इसीलिए, गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और धर्म का जीवंत प्रतीक है — और इसीलिए हिंदू धर्म में गाय की पूजा की जाती है।