
भारत विविधताओं की भूमि है और यहां के त्योहार हमारे सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा हैं। उन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है गणेश चतुर्थी, जिसे विघ्नहर्ता गणेश के जन्मोत्सव के रूप में हर साल भव्य रूप से मनाया जाता है। इस पर्व का विशेष महत्व महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखा जाता है। 10 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।
वर्ष 2025 में गणेश चतुर्थी 1 सितम्बर 2025 (सोमवार) को मनाई जाएगी। इस दिन शुभ मुहूर्त देखकर गणपति की प्रतिमा घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित की जाएगी।
गणेश चतुर्थी 2025: तिथि और मुहूर्त
- गणेश चतुर्थी की तिथि: 1 सितम्बर 2025
- पूजा का शुभ समय (स्थापना मुहूर्त): प्रातःकाल से मध्याह्न तक (विशेष मुहूर्त पंचांग पर आधारित होगा, जिसे लोग अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार देख सकते हैं)
- व्रत अवधि: चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी (11 सितम्बर 2025) तक
गणपति स्थापना की परंपरा
गणेश चतुर्थी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है गणपति स्थापना। माना जाता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी के पूजन से ही होती है। स्थापना के नियम इस प्रकार हैं:
- सुबह स्नान कर घर की सफाई की जाती है।
- पूजा स्थान पर चौकी या पाटे पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
- कलश स्थापना, आम्र पल्लव और नारियल चढ़ाकर वातावरण को पवित्र बनाया जाता है।
- मूर्ति स्थापना के समय पंडित द्वारा अथवा स्वयं भक्त ‘स्थापना मंत्र’ पढ़ते हैं।
- स्थापना के बाद गणपति का आह्वान, प्राण प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना होती है।
गणेश चतुर्थी 2025 पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
गणेश पूजन विशेष विधि से किया जाता है।
- संकल्प – शुभ दिन व समय में व्रत और पूजन का संकल्प लें।
- आवाहन व प्राण प्रतिष्ठा – गणेश जी को आमंत्रित करके प्रतिमा में उनके वास का आह्वान करें।
- अभिषेक – दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं।
- वस्त्र और श्रृंगार – गणेश जी को लाल वस्त्र, चंदन, सिंदूर और आभूषण पहनाएं।
- अर्पण – दूर्वा घास, लाल फूल, मोदक, लड्डू, फल और नारियल चढ़ाएं।
- आरती और भजन – गणेश जी की आरती करें और भक्ति गीत गाएं।
- प्रसाद वितरण – पूजन के बाद प्रसाद बांटें।
- अगले 10 दिनों तक प्रतिदिन आरती और विशेष भोग लगाना आवश्यक है।
गणेश चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माता पार्वती ने पृथ्वी की मिट्टी से गणेश जी की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए। उन्होंने गणेश जी को अपने द्वार पर पहरा देने को कहा। जब भगवान शिव आए और अंदर प्रवेश करना चाहा तो गणेश जी ने रोका। इससे क्रोधित होकर शिव जी ने उनका मस्तक काट दिया। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर शिव जी ने गणेश जी को हाथी के बच्चे का सिर लगाया और उन्हें देवताओं में प्रथम पूज्य बना दिया।
इसी कारण आज भी किसी भी पूजा या शुभ कार्य का आरंभ श्री गणेश के नाम से ही होता है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
- धार्मिक महत्व – यह पर्व श्रद्धालुओं को जीवन से विघ्न-बाधाओं को दूर करने और कार्यों की सिद्धि में सहायता करता है।
- आध्यात्मिक महत्व – गणेश जी बुद्धि, विवेक, समृद्धि और सफलता के प्रतीक हैं।
- सामाजिक महत्व – यह पर्व समाज में भाईचारा, एकता और सामूहिक उत्साह को बढ़ाता है।
- सांस्कृतिक महत्व – महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में बड़े पंडालों में स्थापित भव्य गणेश प्रतिमाएं कलात्मक दृष्टि से मनमोहक होती हैं।
गणेश चतुर्थी के दौरान प्रमुख परंपराएं
- मोदक अर्पण: गणेश जी का प्रिय भोग मोदक है।
- सार्वजनिक गणेशोत्सव: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप दिया था, जो आज समाज को जोड़ने का बड़ा साधन है।
- भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम: इन दिनों भक्ति गीत, नाटक और प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं।
- विसर्जन: अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर धूमधाम से प्रतिमा विसर्जन किया जाता है, जिसे “गणपति बप्पा मोरिया” के जयघोष के साथ लोग विदा करते हैं।
2025 में गणेश चतुर्थी कैसे मनाएं
- घर में पारंपरिक पूजन करें।
- पर्यावरण की रक्षा के लिए इको-फ्रेंडली मूर्ति का ही प्रयोग करें।
- घर-परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें।
- बच्चों को कथा सुनाएं और उनमें भारतीय संस्कृति की समझ बढ़ाएं।
निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी 2025, यानी 1 सितम्बर 2025, श्रद्धा और भक्ति से विघ्नहर्ता को स्मरण करने का विशेष अवसर है। इस दिन गणेश जी की प्रतिमा स्थापना, पूजा-अर्चना और भक्ति से भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जिसमें परिवार, समाज और संस्कृति एक सूत्र में बंध जाती है।
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